Q1. निम्नलिखित पद्याशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिएः
- (क)) गोरी सोवै सेज पर मुख पर डारे केस। चल खुसरो घर आपने रैन भई चहुँ देस॥ [[सरो रैन सोहाग की, जागी पी के संग । तन मेरो मन पिऊ को दोऊ भए एक रंग॥ (800 words)
- (ख)) हम न मरें मरिहै संसारा। हमको मिला जिआबनहारा।। साकत मरहिं संत जन जीवहिं, भरि भरि राम रसाइन पीवहिं। हरि मरहिं तो हमहूँ मरिहैं, हरि न मरै हम काहे कौ मरिहैं। कहै कबीर मन मनहिं मिलावा अमर भया सुखसागर पावां।। (800 words)
- (ग)) अंखियां हरि-दरसन की प्यासी। देख्यौ चाहत कमलनैन कौ, निसि-दिन रहति उदासी ।। आए ऊधौ फिरि गए आंगन, डारि गए फांसी। केसरि तिलक मोतिन की माला, वृन्दावन के बासी।। काहू के मन को कोउ न जानत, लोगन के मन हांसी। सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस कौ करवत लैहौं कासी।। (800 words)
- (घ)) खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि, बनक को बनिज, न चाकर को चाकरी। जविका विहीन लोग सीदमान सोच बस, कहें एक एकन सों, 'कहाँ जाई, का करी? बेदहूँ पुरान कही, लोकहूँ बिलोकिअत, साँ सबै पै, राम! रावर कृपा करी। दारिद-दसानन दबाई दुनी, दीनबंधु ! दुरित-दहन देखि तुलसी हहा करी।। (800 words)
- अमीर खुसरो: आदिकालीन सूफी कवि, गुरु औलिया के निधन पर विरह-मिलन भाव की अभिव्यक्ति।
- कबीरदास: निर्गुण भक्ति संत, आत्मा की अमरता व परमात्मा से एकाकार का दर्शन, राम नाम महिमा।
- सूरदास: कृष्णभक्त कवि, भ्रमरगीत प्रसंग में गोपियों की सगुण विरह वेदना का मार्मिक चित्रण।
- तुलसीदास: रामभक्त कवि, 'कवितावली' में तत्कालीन सामाजिक-आर्थिक संकट का यथार्थवादी चित्रण।
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