Q1. ललित निबंध के उद्भव और विकास पर प्रकाश डालिए।
- ललित निबंध: आत्मपरक, भावात्मक गद्य विधा, जहाँ शैली, कल्पना व सौंदर्यबोध पर जोर होता है।
- उद्भव के प्रारंभिक संकेत: भारतेंदु युग (बालकृष्ण भट्ट, प्रताप नारायण मिश्र) और द्विवेदी युग (सरदार पूर्ण सिंह) में वैयक्तिकता के अंश।
- विकास के अग्रदूत: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, जिन्होंने निबंध को सहजता, सांस्कृतिक चेतना व काव्यात्मकता दी ('कुटज', 'शिरीष के फूल')।
- प्रमुख निबंधकार: हजारी प्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय ललित निबंध के आधार स्तंभ हैं।
Answer: ललित निबंध हिंदी गद्य की एक विशिष्ट और अत्यंत महत्वपूर्ण विधा है, जो विचारों की गंभीरता के साथ-साथ कल्पनाशीलता, भावात्मकता और शैलीगत सौंदर्य का समन्वय करती है। यह निबंध का वह स्वरूप है जहाँ लेखक अपने व्यक्तित्व, अनुभूतियों और चिंतन को मुक्त भाव से प्रकट करता है, जिसमें विषय वस्तु के बजाय उसकी प्रस्तुति शैली अधिक महत्वपूर्ण होती है। ललित निबंध, जिसे भावात्मक या आत्मपरक निबंध भी कहा जा सकता है, विचारों की रूक्षता से परे जाकर पाठक को एक कलात्मक और रसमय अनुभव प्रदान करता है। ललित निबंध अपने परंपराग...