Q1. गीता के सामाजिक महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
- कर्मयोग: फल की चिंता बिना कर्तव्य पालन, सामाजिक व्यवस्था व उत्पादकता हेतु आवश्यक।
- लोकसंग्रह: लोक कल्याण व सामाजिक एकता हेतु श्रेष्ठ व्यक्तियों द्वारा आदर्श आचरण।
- समत्व: सुख-दुःख में समभाव, सामाजिक न्याय, समानता व भेदभाव रहित व्यवहार को बढ़ावा।
- नैतिक मूल्य: सत्य, अहिंसा जैसे गुण समाज की नींव, चरित्र निर्माण व सामाजिक सुदृढ़ता हेतु।
Answer: गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक व्यवहारिक जीवन दर्शन है जिसका सामाजिक महत्व अत्यंत व्यापक और गहरा है। यह व्यक्तियों को सामाजिक प्राणी के रूप में अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझने और उन्हें निष्ठापूर्वक निभाने की प्रेरणा देती है। गीता के सिद्धांत व्यक्तिगत आत्म-प्रबंधन के माध्यम से एक सुव्यवस्थित और सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। गीता का कर्मयोग सिद्धांत समाज के लिए मूलभूत है। यह मनुष्य को फल की चिंता किए बिना अपने नियत कर्मों (स्वधर्म) को कुशलता और समर...