Q1. साहित्यशास्त्र के षड् प्रस्थानों को स्पष्ट कीजिए।
- भारतीय काव्यशास्त्र के षड् प्रस्थान छह प्रमुख साहित्यिक आलोचना सिद्धांत हैं: रस, अलंकार, रीति, ध्वनि, वक्रोक्ति, औचित्य।
- रस संप्रदाय (भरत मुनि): काव्य की आत्मा 'रस' है, जो स्थायी भावों के संयोग से प्राप्त आनंद है।
- अलंकार संप्रदाय (भामह): अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाते हैं, शब्द और अर्थ में चमत्कार उत्पन्न करते हैं।
- रीति संप्रदाय (वामन): 'रीति' (विशिष्ट पद-रचना) काव्य की आत्मा है, जो गुणों के माध्यम से सौंदर्य लाती है।
Answer: भारतीय काव्यशास्त्र में साहित्य के मूल्यांकन और विश्लेषण के छह प्रमुख दृष्टिकोणों या सिद्धांतों को 'षड् प्रस्थान' के नाम से जाना जाता है। ये प्रस्थान काव्य की आत्मा, सौंदर्य और प्रभाव को भिन्न-भिन्न दृष्टियों से परिभाषित करते हैं, जिससे साहित्यिक आलोचना का एक समृद्ध फलक तैयार होता है। इन छह प्रस्थानों ने संस्कृत साहित्य चिंतन को गहराई प्रदान की है। **1. रस संप्रदाय:** यह काव्यशास्त्र का सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण संप्रदाय है, जिसके प्रवर्तक भरत मुनि हैं (नाट्यशास्त्र)। इस संप्रदाय के अनुसार, का...