Q1. रामायण काल में सौन्दर्य के सामान्य स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
- रामायण काल में सौन्दर्य बहुआयामी था, केवल भौतिक नहीं।
- शारीरिक सौन्दर्य आंतरिक गुणों और दैवीयता का प्रतीक था।
- नैतिक सौन्दर्य (चारित्रिक सौन्दर्य) सर्वोच्च माना जाता था (धर्म, सत्य, त्याग)।
- प्रकृति सौन्दर्य पात्रों के मनोभावों को दर्शाता था और कथा को समृद्ध करता था।
Answer: रामायण काल में सौन्दर्य की अवधारणा अत्यंत व्यापक और बहुआयामी थी, जो केवल भौतिक आकर्षण तक सीमित न होकर नैतिक, चारित्रिक, प्राकृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को भी समाहित करती थी। यह सौन्दर्य धर्म, आदर्श और मानवीय मूल्यों से गहराई से जुड़ा हुआ था, जिसमें बाह्य रूप आंतरिक गुणों का प्रतिबिंब माना जाता था। देह सौन्दर्य (शारीरिक सौन्दर्य) का वर्णन रामायण में प्रचुरता से मिलता है। भगवान राम के श्यामल, सौम्य और बलिष्ठ रूप, सीता के कमनीय, दिव्य और कोमल सौन्दर्य तथा लक्ष्मण की तेजस्विता का वर्णन पाठकों को मंत...