Q1. भारतीय समाज को समझने के लिए इंडोलॉजिकल मिशनरी और प्रशासनिक दृष्टिकोण की तुलना कीजिए।
- इंडोलॉजिकल परिप्रेक्ष्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों पर केंद्रित, भारत की 'महान परंपरा' और आदर्शवादी छवि प्रस्तुत करता है।
- मिशनरी परिप्रेक्ष्य ईसाई धर्म के प्रसार से प्रेरित, भारतीय समाज की प्रथाओं (जाति) की आलोचना कर 'बुराइयों' को उजागर करता है।
- प्रशासनिक परिप्रेक्ष्य ब्रिटिश उपनिवेशवादियों द्वारा शासन हेतु विकसित, जनगणना व सर्वेक्षण से भारतीय समाज को वर्गीकृत करता है।
- ज्ञान के स्रोत भिन्न: इंडोलॉजिकल (ग्रंथ), मिशनरी (धार्मिक उपदेश), प्रशासनिक (रिपोर्ट/सर्वेक्षण)।
Answer: भारतीय समाज को समझने के लिए इंडोलॉजिकल, मिशनरी और प्रशासनिक दृष्टिकोण, उपनिवेशवादी युग में भारत के अध्ययन के आधारभूत तरीके थे। इन तीनों ने भारतीय समाज की अलग-अलग व्याख्याएं प्रस्तुत कीं, जो उनके ज्ञान के स्रोत, उद्देश्यों और भारतीय समाज के प्रति उनकी अंतर्निहित मान्यताओं पर आधारित थीं। **इंडोलॉजिकल परिप्रेक्ष्य (Indological Perspective)** यह परिप्रेक्ष्य मुख्य रूप से प्राचीन भारतीय ग्रंथों, शास्त्रों, दर्शन और शास्त्रीय परंपराओं पर केंद्रित था। मैक्स मुलर और ओरिएंटलिस्ट जैसे विद्वानों ने वेदों,...