Q1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।
- (i)) भारतीय पंचांग परम्परा को 'कैलेण्डर' न मानकर 'काल-विज्ञान की प्रणाली' के रूप में सिद्ध कीजिए । नवविध कालमान और वर्ष-समन्वय के आधार पर विवेचन कीजिए। (600 words)
- (ii)) भारतीय नववर्ष परम्पराओं की विविधता का अध्ययन करते हुए स्पष्ट करें कि विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न नववर्ष होने के बावजूद कालगणना की मूल संरचना एक कैसे है। (600 words)
- (iii)) कैलेण्डर समिति और शक संवत् के सन्दर्भ में यह स्पष्ट कीजिए कि आधुनिक भारत में कैलेण्डर सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके पीछे कौन से वैज्ञानिक व राष्ट्रीय उद्देश्य थे। (600 words)
- (iv)) रोमन से ग्रेगोरियन कैलेण्डर तक की विकास-यात्रा को उदाहरण बनाकर समझाइए कि कैलेण्डर सुधार इतिहास में एक वैज्ञानिक अनिवार्यता कैसे बनता है। (600 words)
- (v)) विश्व के प्रमुख कैलेण्डरों (जैसे माया, चीन, मिश्र, ग्रीक) का उद्भव और विकास स्पष्ट कीजिए और विश्लेषण कीजिए कि इनमें भारतीय कालगणना का क्या प्रभाव रहा। (600 words)
- भारतीय पंचांग 'काल-विज्ञान प्रणाली' है, खगोलीय गणनाओं (सौर, चांद्र, नक्षत्रमान) और अधिमास समन्वय पर आधारित।
- भारतीय नववर्ष विविधतापूर्ण हैं (चैत्र प्रतिपदा, मेष संक्रांति), पर मूल कालगणना (सौर-चांद्र, तिथि, नक्षत्र) समान है।
- कैलेण्डर सुधार (डॉ. साहा समिति) ने वैज्ञानिक त्रुटियां सुधारीं और राष्ट्रीय एकता हेतु शक संवत् को अपनाया।
- रोमन से ग्रेगोरियन कैलेण्डर यात्रा खगोलीय त्रुटियों (जूलियन वर्ष की लंबी अवधि) के सुधार की वैज्ञानिक अनिवार्यता दर्शाती है।
Answer: IGNOU course CBKG-003, 'भारतीय तथा विश्व के विभिन्न कैलेण्डर', delves into the intricate science and cultural significance of various calendar systems. The following answers address key aspects of calendrical traditions, focusing on the unique nature of Indian calendrical science, the diversity and underlying unity of Indian New Year traditions, the rationale behind India's calendar reform, the historical evolution of calendars from Roman to Gregorian as a scientific imperative, and an overview ...