Q1. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक लगभग 500 शब्दों में) दीजिए ।
- (i)) सूर्यसिद्धांत, सिद्धांत शिरोमणि और आर्यभटीयम् में प्रस्तुत कालगणना की पद्धतियों की तुलना कीजिए। यह स्पष्ट कीजिए कि इन ग्रंथों में खगोलीय अवलोकनों और गणित का क्या योगदान है। (500 words)
- (ii)) वृहत्संहिता और पंचसिद्धांतिका में वर्णित कालगणना पद्धतियों का विश्लेषण कीजिए। इसमें किस प्रकार सूर्य और ग्रहों के चक्र को समय मापन में उपयोग किया गया, इसे उदाहरण सहित समझाइए । (500 words)
- (iii)) प्लेट टैक्टोनिक्स सिद्धांत का संक्षिप्त परिचय दीजिए। इसके आधार पर पृथ्वी के भूगर्भीय युगों और समय गणना में योगदान बताइए। साथ ही, इस सिद्धांत की प्रमुख सीमाएँ/limitations और विवादों पर चर्चा कीजिए। (500 words)
- (iv)) सृष्टि संवत्, कलि संवत् और युधिष्ठिर संवत् के कालक्रम को स्पष्ट कीजिए। यह बताइए कि इन संवतों का ऐतिहासिक घटनाओं और भारतीय समाज के समयबोध पर क्या प्रभाव पड़ा। (500 words)
- (v)) सप्तर्षि, तिष्य, बार्हस्पत्य, विक्रमी और शक संवतों के संदर्भ में रामायण का काल निर्धारण कीजिए। (500 words)
- (vi)) पुरातत्त्व आधारित काल निर्धारण की सीमाएँ और आलोचनात्मक दृष्टि से संभावित समस्याएँ वर्णित कीजिए। (500 words)
- सूर्यसिद्धांत, सिद्धांत शिरोमणि और आर्यभटीयम् भारतीय कालगणना के प्रमुख ग्रंथ हैं जो खगोलीय अवलोकन और गणित का उपयोग करते हैं।
- वराहमिहिर के पंचसिद्धांतिका और वृहत्संहिता सूर्य-ग्रहों के चक्रों का उपयोग समय मापन और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों में करते हैं।
- प्लेट टैक्टोनिक्स महाद्वीपीय गति को समझाता है और भूगर्भीय युगों व समय गणना में योगदान देता है, पर इसकी सीमाएं और विवाद भी हैं।
- सृष्टि, कलि (3102 ईसा पूर्व) और युधिष्ठिर संवत् भारतीय समाज के ब्रह्मांडीय और ऐतिहासिक समयबोध को आकार देते हैं।
Answer: यह प्रश्न कालगणना और ऐतिहासिक कालक्रम से संबंधित विभिन्न प्राचीन भारतीय ग्रंथों, भूगर्भीय सिद्धांतों और ऐतिहासिक संवतों पर गहन विश्लेषण की मांग करता है। इसमें सूर्यसिद्धांत, सिद्धांत शिरोमणि और आर्यभटीयम् जैसी खगोलीय कृतियों की तुलना, वृहत्संहिता और पंचसिद्धांतिका में वर्णित कालगणना का विश्लेषण, प्लेट टैक्टोनिक्स सिद्धांत का भूगर्भीय समय पर प्रभाव, विभिन्न भारतीय संवतों (सृष्टि, कलि, युधिष्ठिर) का स्पष्टीकरण, रामायण के काल निर्धारण में विभिन्न संवतों (सप्तर्षि, तिष्य, बार्हस्पत्य, विक्रमी, शक) क...