Q1. अधोलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार (04) प्रश्नों के उत्तर लिखिए
- क.) वैदिक गणित के उद्भव पर प्रकाश डालिए । (500 words)
- ख.) आर्यभट्ट और उनके गणितपाद पर लेख लिखिए । (500 words)
- ग.) संख्यास्थानानि और संख्यासारणि प्रणाली के विदेशों में प्रसार पर लेख लिखिए । (500 words)
- घ.) प्राचीन भारत में गणित के विकास पर प्रकाश डालिए । (500 words)
- ड.) वैदिक गणित में प्रयुक्त तकनीकी शब्दों का वर्णन कीजिए । (500 words)
- वैदिक गणित का उद्भव शुल्ब सूत्रों में, यज्ञ वेदियों के ज्यामितीय निर्माण से जुड़ा है, जैसे पाइथागोरस प्रमेय का प्रारंभिक रूप।
- आर्यभट्ट का 'गणितपाद' दशमलव स्थान मान, ज्या-सारणी, कुट्टक विधि, और π के सटीक मान जैसे मौलिक योगदानों का स्रोत है।
- भारतीय स्थान मान प्रणाली और शून्य अरब जगत (अल-ख्वारिज़्मी) और फिर यूरोप (फिबोनाची) के माध्यम से विश्व भर में फैली।
- प्राचीन भारत में गणित का विकास वैदिक काल से शास्त्रीय युग तक विस्तृत है, जिसमें दशमलव, शून्य, बीजगणित, और त्रिकोणमिति प्रमुख हैं।
Answer: प्राचीन भारत में गणित का विकास एक अत्यंत समृद्ध और सुदीर्घ परंपरा का परिणाम है, जिसने वैश्विक गणितीय चिंतन को गहरा प्रभावित किया। यह परंपरा वेदों के काल से आरंभ होकर शास्त्रीय युग तक अपनी चरम सीमा पर पहुँची। भारतीय गणितज्ञों ने अंकगणित, बीजगणित, ज्यामिति, और त्रिकोणमिति जैसे क्षेत्रों में मौलिक योगदान दिए, जिनमें दशमलव स्थान मान प्रणाली और शून्य का आविष्कार सबसे क्रांतिकारी सिद्ध हुआ। यह प्रणाली न केवल भारत में बल्कि अरब जगत के माध्यम से पश्चिमी दुनिया में भी फैल गई, जिससे आधुनिक विज्ञान और प्...