Q1. निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए :
- (क)) बूझत स्याम कौन तू गोरी। कहाँ रहति काकी है बेटी, देखी नही कहूं ब्रज खोरी।। काहे कौं हम ब्रज-तन आवतिं, खेलति रहहिं आपनी पौरी। सूनत रहतिं स्त्रवननि नंद ढोटा, करत फिरत माखनदधि चोरी ।। तुम्हरौ कहा चारि हम लैहें, खेलन चलौ संग मिलि जोरी। सूरदास प्रभु रसिक (-) सिरामनि बातनि भुरह राधिका भोरी।। (500 words)
- (ख)) जाके प्रिय न राम वैदेही। से छड़िए कोटि बैरी समजदपि परम सनेही। तज्यो पिता प्रहलाद विभीषण बंधु भरत महतारी। बलि गुरु तज्यों कंत ब्रज वनतनि भये जग मंगलकारी। नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुसंव्य जहाँ लों। अंजन कहा आंखि तेहि फूटै बहुतक कहौं कहाँ लों। तुलसी सो सब भांति परम हित पूज्य प्राण ते प्यारो। जासों होय सनेह राम पद ये तो मतो हमारो। (500 words)
- (ग)) रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरे मोती मानस चून।। (500 words)
- (घ)) हिमाद्री तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयंप्रभा समुज्ज्वला स्वतन्त्रता पुकारती अमर्त्य वीरपुत्र हो, दृढ़- प्रतिज्ञ सोच लो, असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह सी सपूत मातृभूमि के रूको न शूर साहसी। अराति सैन्य-सिन्धु में-सुवाड़वाग्नि से जलो, प्रवीन हो जयी बनो-बढ़े चलो बढ़े चलो। (500 words)
- सूरदास का पद कृष्ण-राधा के प्रथम मिलन, बाल लीला, वात्सल्य व श्रृंगार रस का चित्रण करता है।
- तुलसीदास का पद राम-भक्ति को सांसारिक संबंधों से ऊपर रखने और अनन्य भक्ति के महत्व पर बल देता है।
- रहीम का दोहा 'पानी' (चमक, आत्मसम्मान, जल) के श्लेष अर्थों से नीतिपरक जीवन-मूल्यों की शिक्षा देता है।
- जयशंकर प्रसाद का गीत राष्ट्रीय चेतना, वीर रस और स्वतंत्रता के लिए बलिदान हेतु आह्वान करता है।
Answer: IGNOU के पाठ्यक्रम EHD-02 - हिंदी काव्य के अंतर्गत दिए गए पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या नीचे विस्तार से प्रस्तुत की गई है। प्रत्येक पद्यांश की व्याख्या में उसका संदर्भ (कवि, रचना, काव्यधारा, प्रसंग), विस्तृत भावार्थ और काव्यगत विशेषताओं का उल्लेख किया गया है, जो विषय वस्तु को पूर्णतः स्पष्ट करते हैं।