Q1. निम्नलिखित काव्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए :
- (क)) जोगिया छाई रह्या परदेस। अब का बिछड्या फेर न मिलिया, बहोरि न दियो संदेस।। या तन ऊपर भसम रमाऊँ, खार करूँ सिर केस।। भगवाँ भेष धरूं तुम कारण, दूँ दूँ चारूं देस।। मीरा के प्रभु गिरधरनागर जीवनि जनम अनेस।। (350 words)
- (ख)) कठण लगन की पीर रे, हरि लागी सोई जाने। प्रीत करी कछु रीत न जाणी, छोड़ चले अधबीच।। दुख की बेला कोई काम न आवे, सुख के सब हैं मीत।। मीरा के प्रभु गिरधरनागर, आखर जात अहीर।। (350 words)
- (ग)) अँखियाँ कृष्ण मिलन की प्यासी। आप तो जाय द्वारका छाये, लोक करत मेरी हँसी।। आम की डार कोयलिया बोलै, बोलत सबद उदासी।। मेरे तो मन (अब) ऐसी आवै, करवत लेहौं कासी।। मीरा के प्रभु गिरधरनागर, चरणकमल की दासी।। (350 words)
- मीरा की कविताएँ कृष्ण के प्रति माधुर्य भाव की विरह-प्रधान भक्ति को व्यक्त करती हैं।
- कृष्ण को 'जोगिया' के रूप में देखना और स्वयं भी उनके लिए सर्वस्व त्याग कर संन्यासिनी बनने की इच्छा अनन्य प्रेम का प्रतीक है।
- मीरा सांसारिक संबंधों की निःसारता और दुख में अकेलेपन को स्वीकारते हुए भी कृष्ण के प्रति अडिग रहती हैं।
- सामाजिक उपहास और प्रियतम की उपेक्षा मीरा के विरह को और तीव्र करती है, जिससे वे चरम निराशा में भी भक्ति नहीं छोड़तीं।
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