Q1. निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए :
- (क)) कदरि कम्भ दोइ चीर पहिराये। चाँद चलन अपुरुब घर लाये।। औ समतोल दीख असि धारा। देख विमोह सरँग पँतारा ।। देखि कम्भ मोर मन तस लागा। सरभैं धरउँ खाल कैं नाँगा।। चौदह चाँन देखि पाँ लागहि। पाप केत बरसहिं कर।। रूप पुतरि गढ़ दस नख लावा। तरुवहि रकत भू तर चलि।। (275 words)
- (ख)) ऐसा ध्यान धरौ बनवारी, मन पवन दृढ़ सुषमन नारी।। से जप जपूँ जो बहुरि न जपना, सो तप तपूँ जो बहुरि न तपना।। से गुरु करूँ जो बहुरि न करना, ऐसो मरुँ जो बहुरि न मरना।। उल्टी गंग जमुन में लाऊँ, बिन ही जल मज्जन दै पाऊँ।। लोचन भरि-भरि बिम्ब निहारूँ, जेति विचारि न और विचारूँ।। (275 words)
- (ग)) बूझत स्याम कौन तू गोरी। कहाँ रहति, काकी है बेटी, देखी तहीं कहूँ ब्रज खोरी।। काहे कौं हम ब्रज-तन आवतिं, खेलति रहतिं आपनी पौरी।। सुनत रहतिं स्रवननि नँद-ढोटा, करत फिरत माखन-दधि चोरी।। तुम्हरौ कहा चोरि हम लैहैं, खेलन चलौ संग मिलि जोरी।। सूरदास प्रभु रसिक-सिरोमनि, बातनि भुरइ राधिका भोरी।। (275 words)
- (घ)) धूर भरे अति शोभित स्याम जू तैसी बनी सिर सुन्दर चोटी। खेलत खात फिरै अँगना पग पैंजन बाजती, पीरी कछोटी।। व छवि को रसखानि बिलोकत बारत काम–कला निज कोटी। काग के भाग बड़े सजनी हरि हाथ सों लै गयो माखन रोटी ।। (275 words)
- जायसी का पद्मिनी वर्णन: सूफी प्रेमाख्यान काव्य में लौकिक सौंदर्य के माध्यम से अलौकिक प्रेम की अभिव्यक्ति.
- कबीर की निर्गुण साधना: हठयोग, मन-पवन नियंत्रण और आत्मशुद्धि पर बल, जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति की कामना.
- सूरदास का प्रथम मिलन: राधा-कृष्ण के बाल-लीला संवाद का मधुर चित्रण, वात्सल्य एवं श्रृंगार रस का समन्वय.
- रसखान का बालकृष्ण वर्णन: धूल सने श्याम की मनोहारी छवि, भक्त की भगवान से निकटता की तीव्र आकांक्षा.
Answer: मध्यकालीन हिंदी साहित्य, विशेषतः भक्ति और प्रेमाख्यान काव्य, भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न अंग है। IGNOU के MHD-23 पाठ्यक्रम में इन काव्यों का विस्तृत अध्ययन किया जाता है, जहाँ विभिन्न कवियों की काव्य-कला, दार्शनिक विचार और सामाजिक संदर्भों की पड़ताल की जाती है। प्रस्तुत पद्यांश हिंदी साहित्य के इन्हीं महत्वपूर्ण कवियों की प्रतिनिधि रचनाएँ हैं, जो उनकी शैली, विषय-वस्तु और भाव-जगत को दर्शाते हैं। ये पद्यांश न केवल कवियों की साहित्यिक प्रवीणता को उजागर करते हैं बल्कि तत्कालीन स...