Q1. नीत्शे, कार्ल मार्क्स, मार्क्यूज़ और फ्रैंकफर्ट स्कूल द्वारा ज्ञानादेय की आलोचना पर चर्चा कीजिए।
- नीत्शे ने ज्ञानादेय के तर्कवाद को अंतःप्रेरणा का दमनकर्ता और 'गुलाम नैतिकता' का जनक बताया, जो शून्यवाद की ओर ले जाता है।
- कार्ल मार्क्स ने ज्ञानादेय के उदारवादी आदर्शों को बुर्जुआ वर्ग की विचारधारा माना, जो आर्थिक शोषण और अलगाव को छुपाती है।
- फ्रैंकफर्ट स्कूल (हॉर्खाइमर-एडोर्नो) ने 'डायलेक्टिक ऑफ एनलाइटनमेंट' में तर्क को 'वाद यंत्र तर्क' के रूप में देखा, जो प्रभुत्व का साधन बन गया।
- 'वाद यंत्र तर्क' के कारण विज्ञान और प्रौद्योगिकी नियंत्रण के उपकरण बने, जिससे 'संस्कृति उद्योग' और अधिनायकवाद को बढ़ावा मिला।
Answer: आधुनिक विश्व के बौद्धिक इतिहास में, ‘ज्ञानादेय’ या प्रबोधन (Enlightenment) ने तर्क, विज्ञान और प्रगति को केंद्रीय मूल्य के रूप में स्थापित किया। इसने मानव मुक्ति और सार्वभौमिक मूल्यों का वादा किया। हालांकि, 19वीं और 20वीं शताब्दी में कई प्रभावशाली विचारकों ने इस ज्ञानादेय की मूल अवधारणाओं और इसके परिणामों की तीखी आलोचना की। नीत्शे ने ज्ञानादेय के तर्कवाद पर गहन हमला किया। उनका मानना था कि प्रबोधन ने मानव के अंतःप्रेरणा, रचनात्मकता और 'इच्छा-शक्ति' (will to power) को दबा दिया है। उन्होंने सार्वभ...