Q1. नाट्य की उत्पत्ति तथा विकास पर विस्तृत निबन्ध लिखिए।
- नाट्य की पौराणिक उत्पत्ति ब्रह्मा के "नाट्यवेद" से मानी जाती है, जिसमें वेदों से तत्व लिए गए।
- भरतमुनि का "नाट्यशास्त्र" भारतीय नाट्यकला का आधारभूत और सैद्धांतिक ग्रंथ है।
- संस्कृत नाट्य (भास, कालिदास) शास्त्रीय नियमों, रस सिद्धांत और विशिष्ट पात्रों (सूत्रधार) के साथ विकसित हुआ।
- मध्यकाल में क्षेत्रीय भाषाओं में लोकनाट्य (रामलीला, नौटंकी) जनजीवन से जुड़कर लोकप्रिय हुए।
Answer: भारतीय नाट्यकला का एक समृद्ध और प्राचीन इतिहास रहा है, जिसकी जड़ें धार्मिक अनुष्ठानों, सामाजिक परंपराओं और पौराणिक आख्यानों में गहरी हैं। नाट्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा है, बल्कि समाज का दर्पण, शिक्षा का माध्यम और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण स्वरूप भी रहा है। इसकी उत्पत्ति और विकास की यात्रा अत्यंत विस्तृत और बहुआयामी है। **नाट्य की उत्पत्ति (Origin of Drama)** भारतीय नाट्य की उत्पत्ति के संबंध में कई मत प्रचलित हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्मा ने सभी वर्णों के लिए एक पाँचव...