Q1(क). निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक लगभग ५०० शब्दों मे) दीजिये
- (i)) भारतीय कालगणना की विशेषताओं को उदाहरण सहित समझाइए। (500 words)
- (ii)) अविक मास और क्षय मास की संकल्पना को विस्तार से स्पष्ट कीविए। (500 words)
- (iii)) भारतीय कालगणना में सप्ताह एवं दिनों की संकल्पना क्या है? उनके नामकरण की पद्धति समझाइए। (500 words)
- (iv)) अयन का अर्थ स्पष्ट करते हुए उत्तरायण एवं दक्षिणायन के महत्त्व को समझाइए। (500 words)
- भारतीय कालगणना लुनिसोलर (चंद्र-सौर) है, जो चंद्रमा और सूर्य की गति के आधार पर समय निर्धारित करती है, ऋतुओं व त्योहारों के लिए अधिक/क्षय मास का उपयोग करती है।
- अधिक मास वह चंद्र मास है जिसमें कोई सूर्य संक्रांति नहीं होती; यह लगभग हर 32 महीने में आता है, कैलेंडर को सौर वर्ष से सिंक्रनाइज़ करता है, और इसे धार्मिक कार्यों के लिए विशेष माना जाता है।
- क्षय मास वह चंद्र मास है जिसमें दो सूर्य संक्रांतियाँ होती हैं; यह अत्यंत दुर्लभ है (19-141 वर्ष), कैलेंडर से एक मास हटा देता है, और अत्यधिक अशुभ माना जाता है।
- भारतीय सप्ताह 7 दिनों का होता है, और दिनों का नामकरण सौरमंडल के सात शास्त्रीय खगोलीय पिंडों (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि) के नाम पर किया गया है।
Answer: