Q1. अधोलिखित में से किन्हीं तीन की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए :
- (क)) अग्निर्होता कविक्रतुः, सत्यश्चित्रश्रवस्तमः । देवो देवेभिरा गमत्।। (500 words)
- (ख)) यः सुन्वते पचते दुध आ चिद् वाजं दर्दर्षि स किलासि सत्यः। वयं त इन्द्र विश्वह प्रियासः सुवीरासो विदथमा वदेम।। (500 words)
- (ग)) येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः। यदपूर्व यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।। (500 words)
- (घ)) यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास् तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्। ते ह नांक महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः (500 words)
- (ङ)) यं क्रन्दसी अवसा तस्तभाने अभ्यैक्षेतां मनसा रेजमाने। यत्राधिसूर उदितो विभाति कस्मै देवाय हविषा विधेम।। (500 words)
- अग्निहोता: अग्नि यज्ञ के आह्वानकर्ता, प्रज्ञावान, सत्यवादी और देवताओं के साथ आने वाले हैं, मानव-देव संबंध के सेतु।
- इंद्र की दानशीलता: इंद्र यज्ञकर्ता को धन प्रदान करने वाले सत्यस्वरूप देवता हैं, भक्त उनकी स्तुति कर शक्ति और पुत्र कामना करते हैं।
- मनः शिवसंकल्पम्: मन सभी कर्मों का मूल है; ऋषि शुभ संकल्पों वाले मन की प्रार्थना करते हैं, जो आंतरिक शुद्धि का प्रतीक है।
- यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः: सृष्टि का उद्भव आदिम यज्ञ से हुआ, जिससे प्रथम नियम (धर्म) स्थापित हुए और देवताओं ने स्वर्ग प्राप्त किया।
Answer: यह प्रश्न वैदिक वाङ्मय एवं भारतीय संस्कृति और सभ्यता पाठ्यक्रम (MSK-005) के अंतर्गत वैदिक मंत्रों की ससन्दर्भ व्याख्या करने के लिए है। वैदिक मंत्र भारतीय संस्कृति और दर्शन के मूल आधार हैं। इनकी व्याख्या करते समय न केवल शाब्दिक अर्थ पर ध्यान दिया जाता है, बल्कि उनके संदर्भ, निहितार्थ, दार्शनिक महत्व और तत्कालीन समाज में उनकी भूमिका को भी समझा जाता है। प्रस्तुत प्रश्न में दिए गए मंत्र ऋग्वेद और यजुर्वेद के विभिन्न सूक्तों से लिए गए हैं, जो अग्नि, इंद्र, मन और प्रजापति जैसे प्रमुख वैदिक देवताओं और ...